Kaanha….Tere rang mein. ..

 

साँवरे तेरे रंग मे कुछ एसे रंग गए

कुछ तुझे याद करते रह गए

कुछ खुदको भूलते चले गए

 

 

तेरे नैनों मे है कुछ एसा नशा

कोई दूजा न समझे उनकी भाषा

 

पुकारती रह जाऊं नाम तेरा

न कभी दिन ढले न कभी शाम मेरा

 

गाए जाऊँ तेरे नाम के ही मधुर गीत

उनमे सजते हैं बस तेरे और मेरे प्रीत

 

ओढती हूँ तुझे बनके मेरी यादें

यादों मे संवरती हूँ जैसे मिली हो सौगातें

 

तेरी आवाज है मेरी रूह की पुकार

वो पुकार है मेरे दिल के गीतों का हार

 

चूड़ियाँ सजती है मुझपर सुनके तेरी आहट

दुल्हन सी सजी हूँ जैसे एक गुडिया की बनावट

 

झुकी निगाहें सुनाए मेरे दिल की कहानी

एक कहानी जिसकी है बढी मीठी सी वाणी

 

मेहंदी लगी है मेरे कोमल हाथों मे

उसे देखने आ जाओ मेरे सपनों मे

 

आंखें देखे तेरा रास्ता हर दिन

इस राधे का मन नही लगे अब तेरे बिन

 

ओ रे कान्हा

तेरे रंग मे कुछ एसे रगो गए

कुछ तुझे याद करते रह गए

कुछ खुदको भूलते चले गए  ।।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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