Raah de Krishna….

 

खडे हैं तेरी चौखट पर मोहना

मन की मासूमियत से तुझे है सजाना

 

हाथों मे है पवित्र पूजा की थाल

जलता है हवाओं में दिया होकर बेहाल

 

रूह मेरी काँपे देखकर तुझे कई बार

जैसे तू मुझसे गुजरा हो अभी होकर आरपार

 

न निकले आवाज न मचता है शोर

मुझे तू नजर आए जैसे सुबह का भोर

 

रहूँ सदा मग्न तेरी सुंदर काया में

न लगे भूख न आए नींद आँखों में

 

चुप्पी तेरी मोहित करे हर पल

बिन बोले ही आती है बोली मुझे आजकल

 

महकता है तू सुनहरे इत्तर के जैसे

गिरता राख जो मलमल सा जले वैसे

 

मैया यशोदा के दिल का लाडला है तू

वृंदावन में श्री कृष्ण बनकर छाया है तू  ॥

 

Advertisements

Kuch lamhe. …

 

भीगी भीगी सी एक शाम जब ढली

रात ने अपनी काली चादर फैला दी

 

बादलों के पीछे से चांद निकल आया

चुपके से जैसे हटा हो घना साया

 

गजब सा लम्हा एक भिखर गया

अंधेरे को जैसे सफेदी सँवर गया

 

खोए रहे चांद की मीठी लौ में

जैसे वही एक अटल है लाखों या सौ में

 

शरमा गए चांद से मधहोशी में

शायद सुना गया वो कुछ बेहोशी में

 

न जाने चांद कैसा जादू भिखर गया

वक्त भी कैसे और कब गुजर गया

 

उलझे रहे चांद की नरम खामोशियों में

और सूरज अपनी अदा भिखरने फिर चला आया  ॥

 

More on Krishna….

 

साँवरे तेरे रंग मे …….

 

तेरी राधा न जाने कब एक परछाई हो गयी

तेरा नाम जपते जपते खुदसे परायी हो गयी

 

सखियाँ कहे राधा तू बावरी हो गयी

कान्हा की याद मे तुझे कैसी बिमारी लग गयी

 

उसे याद करते करते तू हमे भूल गयी

और खुदसे बातें फिजूल करने लग गयी

 

कान्हा बरसो से तेरे नाम की पुजारन हो गयी

पर तुझसे बिछडने से कैसी अभागन हो गयी

 

तुझे पुकारते पुकारते मेरी आवाज खत्म हो गयी

या चलते चलते मै खुद धरती मे भस्म हो गयी

 

तुझसे जुदा होने की अब आदत सी हो गयी

जबसे तुझे मुझमे महसूस करने लग गयी

 

कैसे समझाऊँ सखियों को बात मेरे मन का

की कान्हा तू ही है विश्वास मेरे जीवन का

 

उन्हे समझाते समझाते सुबह से शाम हो गयी

पर सखियाँ अब भी यही कहें

राधा तू सच मे बावरी हो गयी

कान्हा की याद में तू हमसे पराई हो गयी    ॥

First rains….

 

पहली बूँदें बारिश के

जगाए मन मे उल्हास गजब के

सूखी धरती को आस हो जब अंबर से

कुदरत बरसाए विशवास जीवन के

 

मिले सुकून धरती को अंबर से

प्यास जब बुझे ठंडे सावन से

दिखे चारों ओर लहर मस्ती के

खिले जब कुदरत रंगीन खूबसूरती से

 

नदियाँ बहे खुद की मरजी से

जब गिरे सावन आवारगी से

जिदंगी फिर चहके उम्मीद से

जब अंबर बुझाए प्यास धरती के  ॥

Rishtey

 

रिशते

 

कुछ रिशते बन गए

कुछ रिशते बनाए गए

 

कुछ निखर से गए

कुछ बिखर से गए

 

कुछ मेरे ऊम्मीद बन गए

कुछ मेरे करीब रह गए

 

कुछ मे फासले बढ गए

कुछ मेरे वास्ते बदल गए

 

कुछ रिशते यादें बन गई

कुछ मे बातें सहम गई

 

कुछ रिशते दिल से अमीर हो गए

कुछ करीब होकर भी गरीब हो गए

 

कुछ खुशी से उभर गए

कुछ उदासी मे भी संवर गए

 

रास्तों पर चलते चलते लगता है

ना जाने कब

रिशते ही रिशतों को कैसे बदलते गए  ॥

 

 

 

Pehla pyaar

 

गुलशन गुलफाम सा होता है पहला प्यार

जहाँ मन दिल का करता है लाड दुलार

 

रूह की खुशी चेहरे पर छलके

जैसे कोई मीठी बात कही हो हलके हलके

 

झुकी निगाहें सुनाए दिल का बेहाल हाल

मन कहता जाए यारा न पूछ कुछ फिलहाल

 

फिजूल बातें सिखा देते हैं मुस्कुराना

जब मन हो जाता है मौसम सा आशिकाना

 

आईने को देखकर खुदसे ही शरमाना

और न जाने खुदको क्या क्या सुना जाना

 

सजना सँवरना होता है कुछ खास

की शायद वो कहीं दिख जाए होता है एहसास

 

उस खास संदेसे का मीठा सा इंतजार

न जाने कैसे दिल को चीर देता है हर बार

 

दोस्तों की बेरहम सी छेडख़ानी

कमीने हमेशा करते हैं अपनी मनमानी

 

कुछ न कहकर भी सब कुछ कह जाना

यहाँ नजरों का होता है सारा लेना देना

 

कितना कहें हम पहले प्यार के एहसास का

लफ्ज भी समझा न सके कुछ इस भोले से मिठास का ॥