Pehla pyaar

 

गुलशन गुलफाम सा होता है पहला प्यार

जहाँ मन दिल का करता है लाड दुलार

 

रूह की खुशी चेहरे पर छलके

जैसे कोई मीठी बात कही हो हलके हलके

 

झुकी निगाहें सुनाए दिल का बेहाल हाल

मन कहता जाए यारा न पूछ कुछ फिलहाल

 

फिजूल बातें सिखा देते हैं मुस्कुराना

जब मन हो जाता है मौसम सा आशिकाना

 

आईने को देखकर खुदसे ही शरमाना

और न जाने खुदको क्या क्या सुना जाना

 

सजना सँवरना होता है कुछ खास

की शायद वो कहीं दिख जाए होता है एहसास

 

उस खास संदेसे का मीठा सा इंतजार

न जाने कैसे दिल को चीर देता है हर बार

 

दोस्तों की बेरहम सी छेडख़ानी

कमीने हमेशा करते हैं अपनी मनमानी

 

कुछ न कहकर भी सब कुछ कह जाना

यहाँ नजरों का होता है सारा लेना देना

 

कितना कहें हम पहले प्यार के एहसास का

लफ्ज भी समझा न सके कुछ इस भोले से मिठास का ॥

 

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