Samandar kinaare. .

 

लहरें गजब की बातें करती हैं

समंदर अक्सर कुछ समझा ही जाती हैं

 

गुजारी एक शाम समंदर किनारे

भिखरे थे वहां कई टूटे मिनारें

 

मन मे मची थी अजीब सी हलचल

लहरों से बातें खामोशी मे हुई पल पल

 

वक्त रेत की तरह फिसलता गया

और पानी खामोशी मे उलझाता गया

 

सूरज दिन का सलाम देकर चल दिया

और चंद लम्हे झोली में भर गया

 

पानी की ठंडक दे गया कुछ खास

जीने का सलीखा जिसमे हो कुछ मिठास

 

सोचते सोचते कहीं दूर चलते गए

लहरों की दोस्ती में सब भूलते गए

 

जज्बात उभरे आँखों के रस्ते

गीले चेहरे पर कुछ रोते कुछ हस्ते

 

कुछ न कहकर भी मिला मन को सुकून

समंदर उस वक्त लगा कुछ खास और अफ्लातून

 

खामोश होकर भी न जाने कैसे दद॔ खीच गया

और बदले मे मुस्कुराने की सीख दे गया

 

 

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मीठी सी मुस्कुराहट तेरी

जब से दिल में उतर गई

न जाने इस मन को

कितनी बार बरबाद कर गई

 

जज्बातों को कोई आवाज नहीं

जो बयां करे हाले दिल का

बस आँखों ही आँखों में

न जाने क्या क्या समझा गई

 

तुझसे दूर रहना आता नहीं

खुदको समझा लेतें हैं अभी

तेरा दीदार किस तरह करूँ

ये सोचते सोचते जिंदगी गुजर गई  ॥

 

Krishn ki Meera

 

कृष्ण की मीरा है मेरा नाम

कृष्णदासी कहकर करते हैं मुझे बदनाम

 

कान्हा के सिवा कोई नजर न आए मुझे

और लोग कहते हैं रोग लग गया है तुझे

 

छेडती हूँ जब कान्हा के लिए राग

मग्न होकर गाती हूँ जैसे लगी हो आग

 

कान्हा ही मेरी रूह और मेरा जीवन

हुआ है उनके नाम मेरा आत्म समर्पण

 

टोकते हैं सब ना कर बचकानी हरकतें

पर यही लगाते हैं ध्यान कीर्तनों और भजनों में

 

बुलाए मुझे जब भी कान्हा की बंसी

भूल जाऊँ दर्द और आए होठों पर हसीं

 

गाए जाऊँ कान्हा के नाम की माला

लोगों के ताने भी लगे शहद का प्याला

 

ना चाहूँ कोई दौलत या ऐशो आराम

बस लेने दो मुझे कान्हा में थोडासा विश्राम

 

कृपा करो दुनियावालों

कृष्ण की मीरा है मेरा नाम

न करो कृष्णदासी कहकर मुझे बदनाम   ॥