Beauty of the moon

 

ऐ चाँद

 

किन लफ्जों मे उतारूँ तेरी हसरत को

लफ्जों को ही बहकाए एसी बहकाती नीयत है तू

 

आसमान का खूबसूरत ख्वाब है तो

अंधेरों का जवाब लाजवाब है तू

 

भिखरते लौ का मासूम एहसास है तो

उलझे जज्बातों का बेजुबान दोस्त खास है तू

 

तुझे देख कोई मुसाफिर का जब मन डोले

कुदरत के एसे खजाने का हीरा नायाब है तू

 

बादलों के पीछे से जब तू दिखाए अपना चेहरा

अनसुने अरमान दिल के जगे चाहे लगे सक्त पेहरा

 

जब भी दिल से देखे तुझे कोई

हर बार अलग नजर आता नजराना है तू

 

सुनहरी यादों को सुनहरा बनाता है तो

सुनहरे लम्हों मे सुनहरा जान डालता है तू

 

पूछे अगर मुझसे कोई क्या लागे है तू मेरा

एक मधहोश जान की जिंदा सांस मे जिंदा है तू    ॥

 

 

 

 

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