The Moon & the Taj

 

चाँद को निहारूं या तुझे देखूँ ऐ ताज

मेरी दुनिया में खलबली मची है आज

 

वो अंबर की जान तू इश्क की पहचान

दोनो रहते हो बनके दिल के मेहमान

 

उसकी खूबसूरती रिझाए तेरी क्यों रुलाए

बहुत कुछ कहते हो खामोशी में हाए

 

वो लफ्जों का खज़ाना तू जज्बातों का कब्र

देखकर दोनों को खो देती हूँ अपना सब्र

 

वो गरदिशों का सच तू पन्ना इतिहास का

तुम्हें साथ देखकर बहे अश्क एहसास का

 

वो करे बातें मुझसे सरफरोशी में

तू छलकाए जज्बात आँखों की उदासी में

 

बनके दद॔ – ए – दिल बहे कलम की स्याही आज

अनमोल लफ्ज भी हैं लफ्जों के आज मोहताज   ॥

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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